हिमाचल को एक महीने में ही 7000 करोड़ से अधिक की चपत

हिमाचल को एक महीने में ही 7000 करोड़ से अधिक की चपत The hill state of Himachal Pradesh has been hit hard by the corona virus. All commercial activities including tourism and industrial have been stalled for a long time. The sources of revenue generation of the government have dried up. Within the month, the state has already spent more than 7000 crores. The boom in economic damage figures has just been made. On the economic front, it still has more consequences. Chief Minister Jairam Thakur has also accepted this killing of Corona. He says that about 350 crore decline in government revenue has come within a month.

In the industrial sector BBN, which gives the highest 63 per cent revenue to the government, has lost about Rs 5000 crore in 28 days of lockdown. Apart from the city council Nalagarh and Baddi, thousands of crores have been lost due to the sealing of 41 panchayats in the area. In addition to about 50 pharma units in the Containment Zone here, production in about 100 other industries is at a standstill. Industries from other sectors of BBN are also closed. Exempted pharma and food processing industries are also able to produce only 20 to 30 per cent.

Shailesh Aggarwal, vice chairman of CII Himachal Chapter, is also admitting that BBN sector industries have suffered a loss of Rs 5000 crore. It will take time to improve the situation even if the industries are approved to work. The economy of Solan district topped in income has also collapsed. The government has incurred revenue of about 80 crores from Solan district itself. The businessmen of the city are suffering a loss of eight crore daily. In the last 28 days, about two and a half billion rupees have been lost.

Excise and Taxation Commissioner Himanshu Panwar says that Solan district is the biggest economic loss due to being a leader in revenue collection. President of Solan Vyapar Mandal, Mukesh Gupta, says that it is a time of crisis for the four thousand businessmen of the city. The condition of tourism, the strong pillar of the state’s economy, is also poor. Corona has hurt tourism business by about one thousand crores in a month.

About 150 hotels, private hotels, home stay units and guest houses of the State Tourism Corporation are closed during the tourist season. The employment of millions of people associated with the tourism business is closed. Around 2000 hotels in the district, including Kullu-Manali, are closed. The hotel business in the district is estimated to result in a loss of 300 crores in a month. According to Manali Hotel Association President Anoop Ram Thakur, the corona hit has destroyed the entire tourism industry.

In Chamba district, including Dalhousie and Khajjiar, tourism traders have lost more than 20 crores. Farmers, including hotels, restaurants, taxis and private bus operators in the district Hamirpur have lost more than Rs 100 to 120 crore. Bilaspur district has a loss of more than 320 crores.
The loss figure in Sirmaur district is 200 crores.

Apart from the industrial areas Kalaamb and Paonta Sahib, all the activities including industry, tourism, transport are stalled in the district. The Excise and Taxation Department has incurred a loss of 40 crores in the revenue head. In the biggest district of Kangra, tourism, industry and other business sectors including agriculture, a loss of one thousand crore is estimated in this period.

हिमाचल को एक महीने में ही 7000 करोड़ से अधिक की चपत पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश पर कोरोना वायरस की तगड़ी मार पड़ी है। पर्यटन और औद्योगिक समेत तमाम व्यावसायिक गतिविधियां अरसे से ठप हैं। सरकार के राजस्व अर्जन के स्रोत सूख गए हैं। महीने के भीतर ही करीब 7000 करोड़ से अधिक की चपत प्रदेश को लग चुकी है। आर्थिक क्षति के आंकड़ों में उछाल अभी बना है। आर्थिक मोर्चे पर इसके अभी और दुष्परिणाम आने बाकी हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी कोरोना की इस मार को स्वीकार चुके हैं। उनका कहना है कि सरकारी राजस्व में करीब 350 करोड़ की गिरावट एक माह के भीतर आ चुकी है।

सरकार को सर्वाधिक 63 फीसदी राजस्व देने वाले औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में ही लॉकडाउन के 28 दिन में करीब 5000 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है। नगर परिषद नालागढ़ व बद्दी के अलावा क्षेत्र में 41 पंचायतें सील होने से हजारों करोड़ का नुकसान हो चुका है। यहां कंटेनमेंट जोन में ही करीब 50 फार्मा इकाइयों के अलावा करीब 100 अन्य उद्योगों में उत्पादन ठप है। बीबीएन के अन्य क्षेत्रों के उद्योग भी बंद हैं। छूट प्राप्त फार्मा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भी 20 से 30 फीसदी का ही उत्पादन कर पा रहे हैं।

सीआईआई हिमाचल चैप्टर के वाइस चेयरमैन शैलेष अग्रवाल भी स्वीकार कर रहे हैं कि 5000 करोड़ का नुकसान बीबीएन क्षेत्र के उद्योगों को उठाना पड़ा है। उद्योगों को काम करने की मंजूरी मिलने के बावजूद हालात सुधरने में समय लगेगा।  आय में अव्वल सोलन जिले की अर्थव्यवस्था भी चरमरा चुकी है। सरकार को सोलन जिले से ही करीब 80 करोड़ राजस्व की चपत लग चुकी है। शहर के कारोबारियों को रोजाना आठ करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले 28 दिनों में करीब सवा दो अरब रुपये का नुकसान हो चुका है।

आबकारी एवं कराधान आयुक्त हिमांशु पंवर का कहना है कि राजस्व संग्रहण में अग्रणी होने के कारण सोलन जिले में आर्थिक क्षति सबसे ज्यादा है। सोलन व्यापार मंडल के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता का कहना है कि शहर के चार हजार कारोबारियों के लिए यह संकट की घड़ी है। प्रदेश की आर्थिकी के मजबूत स्तंभ पर्यटन की स्थिति भी खराब है। कोरोना ने पर्यटन कारोबार को एक महीने में ही करीब एक हजार करोड़ की चोट पहुंचा दी है।

पर्यटन सीजन में प्रदेश पर्यटन निगम के करीब डेढ़ सौ होटलों, निजी होटलों, होम स्टे यूनिटों व गेस्ट हाउस बंद पड़े हैं। पर्यटन कारोबार से जुड़े लाखों लोगों का रोजगार बंद है। कुल्लू-मनाली समेत जिले के करीब 2000 होटल बंद हैं। जिले में होटल कारोबार से ही एक माह में 300 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। मनाली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप राम ठाकुर के अनुसार कोरोना की मार ने पूरा पर्यटन उद्योग बरबाद कर दिया है।

डलहौजी व खज्जियार समेत चंबा जिले में पर्यटन कारोबारियों को 20 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। जिला हमीरपुर में होटल, रेस्तरां, टैक्सी और निजी बस ऑपरेटरों समेत किसानों को 100 से 120 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। बिलासपुर जिले में करीब 320 करोड़ से अधिक नुकसान है।
सिरमौर जिले में भी नुकसान का आंकड़ा 200 करोड़ है।

औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब और पांवटा साहिब के अलावा जिलेभर में उद्योग, पर्यटन, ट्रांसपोर्ट समेत तमाम गतिविधियां ठप हैं। आबकारी एवं कराधान विभाग को राजस्व मद में 40 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा है। प्रदेश के सबसे बड़े जिले कांगड़ा में पर्यटन, उद्योग और कृषि समेत अन्य व्यवसायिक क्षेत्र में एक हजार करोड़ का नुकसान इस अवधि में होने का अनुमान है।

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Author: admin