Himachal Pradesh स्कूलों में टीजीटी के हजारों पद भरने में होगी और देरी

हाई कोर्ट में इकोनॉमिक । वीकर सेक्शन का केस पहला कारण :- राज्य सरकार ने बीपीएल श्रेणी को आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग में समायोजित कर दिया जिससे कि बीपीएल श्रेणी के उम्मीदवारों के साथ अन्याय किया गया है। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया प्रार्थी की दलीलों से सहमति पाते हुए फिलहाल उस रिक्विजिशन पर रोक लगा दी थी जिसके तहत आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के उम्मीदवारों के नाम रोजगार कार्यालय से मंगाए गए थे। अब इक्वीलेंस के विवाद में फैसले का भी करना होगा इंतजार
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक रोहित जम्वाल ने बताया कि टीजीटी भर्ती में इक्वीलेस पर फैसले का इंतजार करना होगा। इस बारे में सरकार से फैसला होने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया को बहाल किया जाएगा। इसलिए फिलहाल काउंसिलिंग का नया शेड्यूल जारी नहीं हुआ है। दूसरा आरक्षण को लेकर विवाद हाई कोर्ट में भी है
राज्य में ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर्स यानी टीजीटी की भर्ती में अभी ओर देरी हो सकती है। एक तो बैचवाइज भर्ती में पहले ही अनलॉक टू के कारण काउंसिलिंग को रोका गया था। दूसरा हाईकोर्ट में इकोनॉमिक वीकर सेक्शन के आरक्षण का केस चल रहा है। लेकिन अब तीसरी वजह आ गई है रूसा डिग्री की इक्वीलेंस पर अंतिम फैसले की। दरअसल, 2013 से 2016 के बीच ग्रेजुएट हुए छात्र छात्राओं की डिग्री के सब्जेक्ट टीजीटी मेडिकल और नॉन मेडिकल के भर्ती नियमों के अनुसार नहीं हैं। इस मसले को हल करने के लिए राज्य सरकार ने एचपीयू के नियंत्रण में एक इक्वीलेंस कमेटी का गठन किया था। इसमें शिक्षा निदेशक भी सदस्य थे। इस कमेटी ने सशर्त मंजूरी देने संबंधी अपनी रिपोर्ट दे दी है। लेकिन इस पर सरकार को फैसला लेना है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के गलत सब्जेक्ट कांबिनेशन के फेर में फंसे हजारों विद्यार्थियों को एकमुश्त छूट देकर ही राहत दी जा सकती है। अन्यथा इस भर्ती के लिए भर्ती नियमों को बदलना होगा, जो एक लंबी प्रक्रिया
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Author: admin

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